आभार :
कविता सागर की अनमोल कृतियों के लिए -
जिनको पढ़ कर मेरे ये भाव जगे !
x x x x
पथ बना सकता नहीं
पर लुभाने जो लगे
विमुख हो सकता नहीं
है कठिन पथ का चयन
मै मनाता हूँ ,
भानु की इन रश्मियों में
वह भी कठिन लगता नहीं !
आपका पथ भा गया मन को मेरे ,
आभार का शब्द रुक सकता नहीं !
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