Friday, 22 March 2013


आभार :
कविता सागर  की  अनमोल कृतियों के लिए -
जिनको   पढ़ कर मेरे ये भाव जगे !
       x x x x

पथ  बना  सकता  नहीं
पर  लुभाने  जो  लगे
विमुख  हो  सकता  नहीं
है  कठिन  पथ  का  चयन
मै मनाता  हूँ ,
भानु  की  इन  रश्मियों  में
वह  भी  कठिन  लगता  नहीं  !
आपका  पथ  भा  गया  मन  को  मेरे ,
आभार  का   शब्द  रुक  सकता  नहीं !

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